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अधूरा स्वप्न

Krishna kumar jha Anveshak

कविता काल वेगसँ चलय निरन्तर हमहूँ सँगमे गमन करै छी। मन्द-मन्द गति चलैत जीवन किछु मनोरथ कहि रहल छी।।१।। बाँकी अछि किछु कर्ज चुकाएब किछु फर्ज निभाएब अछि बाँकी। व्यथा मेटाएब आवश्यक किछु किछु प्रथा चलाएब अछि बाँकी।।२।। निर्गत अछि जीवन निरन्तर किछु रुसल किछु पाछू छूटल। सम्बन्ध किछु बनि …

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मिथिला महिमा

मैथिली-कविता

मिथिला महिमा मैथिलवंशक अमरसुमन यश इतिहासो अछि गावि रहल । अपूर्ण पञ्चम बालक शंकर त्रिलोक महिमा गाबि चुकल ।। सीता सब मैथिल कन्या छथि पिता जनकपद पाबि चुकल । जगदम्बा जनकक आँगनमें बेटी बनि छथि आबि चुकल ।। त्रिभुवनपति जामाता जिनकर सदेह-विदेह पद पाबि चुकल । धनुषयज्ञसँ पुरुषपरीक्षा मैथिल गुण-गौरव …

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