Home / कविता

कविता

मैथिली कविता

Maithili Darpan Showcase articles, news, poems, astrological predictions and a variety of interesting topics in Maithili.

  • Maithili Darpan request your participation and wants you to be part of its success. We highly encourage you to submit an article, news item, poem, or scintillating Mithila recipes.
  • An All Maithili Magazine –  Maithili Darpan is a maithili magazine published from mumbai it features content about mithila.

अधूरा स्वप्न

Krishna kumar jha Anveshak

कविता काल वेगसँ चलय निरन्तर हमहूँ सँगमे गमन करै छी। मन्द-मन्द गति चलैत जीवन किछु मनोरथ कहि रहल छी।।१।। बाँकी अछि किछु कर्ज चुकाएब किछु फर्ज निभाएब अछि बाँकी। व्यथा मेटाएब आवश्यक किछु किछु प्रथा चलाएब अछि बाँकी।।२।। निर्गत अछि जीवन निरन्तर किछु रुसल किछु पाछू छूटल। सम्बन्ध किछु बनि …

Read More »

मातृ वन्दना

मैथिली-कविता

कविता:- मातृदिवस ममतामयि केर वन्दन नीज श्रद्धा अर्पित करथि सन्तान। मातृ ऋणक प्रतिकार कोनों नञ जगमे मायक महिमा अछि महान।१। नित्य चरण वन्दन हे करुणामयि! स्नेहसुधा पाओल तन-मन अपार। करुणामयि!करुणा केर सागर छी जननी छथि सृष्टि चक्रक आधार।२। कोखि राखि एहि जगमे आनल हिय क्षीरनिधि आहारक निर्माण। सन्तति के नेह-स्नेह …

Read More »

कलियुगक प्रभाव

मैथिली-कविता

कलियुगक प्रभाव कलियुग सगतरि पैSर पसारल स्वरुप युगके बदलि रहल अछि। कलुषित बनल मनुष्यक जीवन लोक धर्मके बिसरि चुकल अछि।।१।। देलनि परिक्षित जे स्थान बासके स्वर्ण मदिरा ओ परस्त्री गमनमे। देखि रहल छी ओकर फला-फल चारिम अछि जुआ उँच भवनमे।।२।। धनके ईच्छा सबसँ अछि बलगर सम्मानित अछि मदिरा ओहिमे। अर्ध …

Read More »

मिथिला महिमा

मैथिली-कविता

मिथिला महिमा मैथिलवंशक अमरसुमन यश इतिहासो अछि गावि रहल । अपूर्ण पञ्चम बालक शंकर त्रिलोक महिमा गाबि चुकल ।। सीता सब मैथिल कन्या छथि पिता जनकपद पाबि चुकल । जगदम्बा जनकक आँगनमें बेटी बनि छथि आबि चुकल ।। त्रिभुवनपति जामाता जिनकर सदेह-विदेह पद पाबि चुकल । धनुषयज्ञसँ पुरुषपरीक्षा मैथिल गुण-गौरव …

Read More »