Home / Prof.Krishna Kumar Jha Anveshak

Prof.Krishna Kumar Jha Anveshak

मुख्य संपादक

अधूरा स्वप्न

Krishna kumar jha Anveshak

कविता काल वेगसँ चलय निरन्तर हमहूँ सँगमे गमन करै छी। मन्द-मन्द गति चलैत जीवन किछु मनोरथ कहि रहल छी।।१।। बाँकी अछि किछु कर्ज चुकाएब किछु फर्ज निभाएब अछि बाँकी। व्यथा मेटाएब आवश्यक किछु किछु प्रथा चलाएब अछि बाँकी।।२।। निर्गत अछि जीवन निरन्तर किछु रुसल किछु पाछू छूटल। सम्बन्ध किछु बनि …

Read More »